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शाम की पल्स: अमेठी में सपा के बागी भाजपाई बने, हाईकोर्ट बोला- तीन महीने में कराओ पंचायत चुनाव
सपा के टिकट पर जीते तीन विधायक भाजपा में शामिल हुए, केशव मौर्य ने अखिलेश को जवाब दिया और योगी ने वाराणसी में परिषद चुनाव का मोर्चा संभाला। पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट की समय सीमा और मेरठ में फांसी की सजा ने दिन की तस्वीर पूरी की।
पैन इंडिया पल्स डेस्कइन रिपोर्टों पर आधारित: ThePrint (PTI), The Week, Amar Ujala, Khari News / IANSRead in English
सुबह जिस वफादारी की जंग का जिक्र हमने किया था, वह दिन भर में पूरी तरह खुलकर सामने आ गई, और शाम को प्रयागराज से हर दल के लिए बड़ी परीक्षा का फैसला आया। सपा के टिकट पर जीते तीन विधायक अमेठी में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए, मुख्यमंत्री योगी ने वाराणसी में शिक्षकों से कहा कि सपा पर 'भूलकर भी' भरोसा न करें, और केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश के 'स्वाभिमान' वाले तंज का जवाब दिया। फिर शाम चार बजे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने का आदेश सुना दिया।
गौरीगंज का कार्यक्रम तय योजना के मुताबिक हुआ। पीटीआई के हवाले से द प्रिंट ने बताया कि गौरीगंज के राकेश प्रताप सिंह, गोसाईंगंज के अभय सिंह और कालपी के विनोद चतुर्वेदी ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। अभय सिंह ने रामचरितमानस विवाद को वजह बताया और 2027 में सपा उम्मीदवार को हराने का संकल्प लिया, जबकि चतुर्वेदी ने बुंदेलखंड के विकास की दुहाई दी। 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद सपा ने जून 2025 में राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह को निष्कासित कर दिया था।
सुबह हमने पूछा था कि क्या तीनों विधायक सीट छोड़ेंगे। इसका जवाब नहीं मिला; जिन रिपोर्टों को हमने पढ़ा, उनमें इस्तीफे का कोई जिक्र नहीं है। स्मृति ईरानी ने मंच से कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गांधी परिवार में अमेठी से अकेले चुनाव लड़ने का साहस नहीं है, और पंकज चौधरी ने 2027 में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनने का दावा किया।
सपा ने भी जवाब दिया। प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने द वीक से कहा कि पार्टी तीनों को पहले ही निकाल चुकी है और वे 'अपेंडिक्स' जैसे बेकार अंग हैं। द वीक के विश्लेषण के मुताबिक अवध से बुंदेलखंड तक फैली इन सीटों के जरिए भाजपा सपा के पीडीए दांव में सेंध लगाना चाहती है, लेकिन टिकट की आस लगाए अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी का जोखिम भी उठा रही है।
अखिलेश-केशव की जुबानी जंग भी आगे बढ़ी। ललूराम और परदाफाश के मुताबिक मौर्य ने एक्स पर लिखा कि स्वाभिमान की परिभाषा सत्ता की कुर्सी से नहीं, विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा से तय होती है। उन्होंने अखिलेश पर परिवारवाद का आरोप लगाया, उनके 'पारिवारिक शिष्टाचार' पर तंज कसा और कहा कि 2027 में जनता सपा की सफाई करेगी। शाम तक अखिलेश का कोई नया जवाब हमें नहीं मिला।
वाराणसी में योगी ने 23 अक्टूबर के विधान परिषद चुनाव का प्रचार और तीखा कर दिया। अमर उजाला के अनुसार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षक-स्नातक महासम्मेलन में उन्होंने 'गिरगिटों' से सावधान रहने को कहा और राज्यसभा टिकटों का हवाला देकर सपा के पीडीए को 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' बताया। आईएएनएस के मुताबिक उन्होंने आरोप लगाया कि सपा राज में भर्तियों पर 'सैफई सिंडिकेट' का कब्जा था, और बेसिक से विश्वविद्यालय तक के शिक्षकों के लिए पांच लाख रुपये तक के स्वास्थ्य कवर का ऐलान किया। ये उनके दावे हैं; सपा की प्रतिक्रिया हमें नहीं मिली।
दिन की सबसे बड़ी खबर हाईकोर्ट से आई। अमर उजाला और डायनामाइट न्यूज के मुताबिक न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तीन महीने में कराने का आदेश दिया और चुनाव तक निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने की व्यवस्था को सही ठहराया। डायनामाइट न्यूज के अनुसार अदालत ने चुनाव को ओबीसी आयोग के काम पूरा होने से नहीं बांधा, आयोग अपना काम जारी रखेगा। पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने फैसले का स्वागत किया, पर सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला बताया।
मेरठ में जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने नीला ड्रम कांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या के लिए फांसी की सजा सुनाई, फ्री प्रेस जर्नल और टाइम्स नाउ हिंदी ने बताया। बचाव पक्ष की वकील रेखा जैन ने मुस्कान की दो बेटियों का हवाला देकर नरमी मांगी थी। सौरभ की मां रेणु देवी ने कहा कि जिस न्याय के लिए लड़ रहे थे, वह मिल गया।
मुजफ्फरनगर में 81 वर्षीय पुजारी स्वामी देवानंद भारती की हत्या की जांच दिन भर चली, लेकिन शाम तक किसी गिरफ्तारी या मकसद के खुलासे की खबर हमें नहीं मिली।
पल्स व्यू
पल्स डेस्क का विश्लेषणअमेठी और प्रयागराज ने आज एक ही सवाल पर दो अलग कहानियां कहीं: फैसला किसके हाथ में है। अमेठी में तीन विधायकों ने कार्यकाल के बीच नया दल चुन लिया और जिन मतदाताओं ने उन्हें सपा के टिकट पर जिताया, उन्हें अपनी बात कहने के लिए 2027 तक रुकना होगा। प्रयागराज में अदालत ने सरकार से कहा कि आयोग का होमवर्क पूरा होने तक गांव के मतदाताओं को उनके चुनाव से वंचित नहीं रखा जा सकता। एक घटना ने मतदाता की भूमिका फिलहाल सीमित की, दूसरी ने बढ़ाई।
अदालत के आदेश ने सियासी कैलेंडर भी बदल दिया है। अगले तीन महीने में पंचायत चुनाव हुए तो 2027 से पहले ग्रामीण मिजाज की यह सबसे बड़ी परीक्षा होगी, और वह भी ऐसे ओबीसी आरक्षण पर, जो अभी तय नहीं है। भाजपा के पास यह दिखाने का मौका होगा कि दलबदल और योजनाएं गांव के वोट में बदलती हैं; सपा के पास यह साबित करने का कि तीन विधायकों के जाने के बाद भी पीडीए टिका है। दोनों पक्षों में से कोई देरी भी चाह सकता है, इसलिए राजभर का सुप्रीम कोर्ट वाला इशारा अहम है।
अगर ओबीसी आरक्षण पूरी तरह तय होने से पहले पंचायत चुनाव का समय आ जाए, तो क्या चुनाव समय पर होने चाहिए, या न्यायसंगत आरक्षण के लिए प्रशासकों के भरोसे कुछ महीने और इंतजार ठीक है?
किसने क्या कहा
For our party, they are vestigial organs, like an appendix that grows and hurts.
The Gandhi family does not have the courage to contest elections alone in Amethi
सपा पर भूलकर भी विश्वास मत करना
स्वाभिमान की परिभाषा सत्ता की कुर्सी से नहीं, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति समर्पण से तय होती है।
हमें वह न्याय मिला जिसके लिए हम लड़ रहे थे
आगे किस पर नज़र रखें
- सरकार तीन महीने की समय सीमा मानती है या सुप्रीम कोर्ट जाती है, और राज्य निर्वाचन आयोग कब कार्यक्रम घोषित करता है
- भाजपा में गए तीनों विधायकों की सदस्यता पर सपा की कोई याचिका या कदम
- वाराणसी में योगी का दूसरा दिन, और 23 अक्टूबर से पहले 'गिरगिट' व 'सैफई सिंडिकेट' वाले बयानों पर सपा का जवाब
- 16 अक्टूबर को मेरठ के सर्पदंश हत्याकांड में सजा, और नीला ड्रम केस में संभावित अपील
- मुजफ्फरनगर पुजारी हत्याकांड की जांच में प्रगति
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स्रोत
- SP rebel MLAs join BJP at Amethi event; Irani targets Gandhi family ThePrint (PTI)
- The real reason why BJP welcomed 3 rebel SP MLAs to its fold in Uttar Pradesh The Week
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