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सुबह की पल्स: सड़क के जवाब में शाह के चुनावी आंकड़े, कांग्रेस ने लगाया धांधली का आरोप
अमित शाह ने निकाय और उपचुनाव नतीजों के सहारे राहुल गांधी से कहा कि हार की वजह SIR नहीं है; जयराम रमेश ने इसे डींग बताया। जंतर-मंतर पर यूथ कांग्रेस की याचिका नवंबर तक टली। बाजार सपाट खुले।
पैन इंडिया पल्स डेस्कइन रिपोर्टों पर आधारित: ThePrint (ANI), Asianet Newsable (ANI), The Daily Jagran, ScrollRead in English
आखिरकार सरकार की ओर से जवाब आया, और वह प्रक्रिया नहीं, आंकड़ों की भाषा में आया। कल शाम हमने लिखा था कि विपक्ष की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भाजपा चुप है। हमारी इवनिंग पल्स के कुछ ही देर बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी को सीधा संदेश दिया कि मतदाता सूची की लड़ाई दरअसल हारे हुए चुनावों पर पर्दा है। आधी रात तक कांग्रेस ने पलटवार किया कि 2029 की धांधली अभी से शुरू हो चुकी है। दोनों ने एक-दूसरे के सबूतों पर बात नहीं की, अपने-अपने आंकड़े गिनाए।
द प्रिंट और एशियानेट न्यूज़ेबल (दोनों ANI के हवाले से) के मुताबिक शाह ने मंगलवार शाम दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में भाजपा ने 90% नगर निगम, 66% नगर परिषद और 65% नगरपालिकाएं जीतीं, और 85% से ज्यादा वार्डों में आप की ज़मानत ज़ब्त हुई। त्रिपुरा के ग्राम समिति चुनावों में, उनके अनुसार, कांग्रेस करीब 4,600 में से सिर्फ 14 सीटें जीत पाई। एनडीए की सीटों के जो आंकड़े छपे, वे आपस में मेल नहीं खाते, इसलिए हमने उन्हें छोड़ दिया है।
दैनिक जागरण और स्क्रॉल के अनुसार शाह ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के उपचुनावों का हवाला देते हुए कहा कि वहां कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीती। उनका तर्क साफ था: कांग्रेस विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले भी हार रही थी, तो हार का ठीकरा SIR पर क्यों। स्क्रॉल और प्रभासाक्षी के मुताबिक उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राहुल गांधी SIR के विरोध की आड़ में "घुसपैठियों" को बचाना चाहते हैं, और 2029 में "करारी हार" के लिए तैयार रहने को कहा। यह राजनीतिक दावा है, कोई परखा जा सकने वाला अनुमान नहीं।
कांग्रेस का जवाब देर रात आया। ANI और स्क्रॉल के अनुसार संचार प्रभारी जयराम रमेश ने X पर लिखा कि शाह फिर अपने "3 B" यानी बॉम्बैस्ट, ब्लफ़ और ब्लस्टर के साथ लौटे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शाह 2029 के चुनाव में हेरफेर की तैयारी में हैं और सरकार जाने पर उन्हें जांच का सामना करना पड़ेगा। ये आरोप हैं; किसी रिपोर्ट में इनके सबूत नहीं थे, और रमेश पर भाजपा की प्रतिक्रिया हमें नहीं मिली।
अदालतें अपनी रफ्तार से चल रही हैं। एशियानेट न्यूज़ेबल और दैनिक जागरण के मुताबिक दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित महाजन ने मंगलवार को भारतीय युवा कांग्रेस और उसके अध्यक्ष उदय भानु चिब की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका दिल्ली पुलिस के 1 अक्टूबर के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दी गई थी। पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के बाद जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है, इसलिए याचिका का अब मतलब नहीं रह गया। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
कल रात के अधूरे सवाल अब भी अधूरे हैं। INDIA गठबंधन की SIR याचिका की 14 खामियां दूर होने की कोई खबर नहीं मिली, इसलिए वह अब तक सूचीबद्ध नहीं हुई। इस्तीफे की मांग पर चुनाव आयोग या ज्ञानेश कुमार का कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया, और सोमवार की FIR में नामज़द नेताओं को पुलिस नोटिस की भी कोई खबर नहीं है। राहुल गांधी ने जिस अगले कदम को सरप्राइज़ बताया था, वह अभी सामने नहीं आया।
मंगलवार की 1,109 अंकों की छलांग के बाद बाजार ने सांस ली। बिजनेस स्टैंडर्ड और IANS के मुताबिक सेंसेक्स लगभग सपाट खुला, निफ्टी शुरुआती कारोबार में 22,700 से नीचे फिसला और लगातार दूसरे दिन आईटी शेयर आगे रहे। ब्रेंट क्रूड 106-107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार रुपया 27 पैसे मज़बूत होकर करीब 95.01 प्रति डॉलर पर खुला।
पल्स व्यू
पल्स डेस्क का विश्लेषणशाह के बयान ने लड़ाई का मैदान बदल दिया है। अब तक सरकार प्रक्रिया के सहारे जवाब दे रही थी: रजिस्ट्री की आपत्तियां, FIR, जंतर-मंतर का डी-नोटिफिकेशन। अब सबसे बड़े रणनीतिकार ने इसे जनादेश की लड़ाई बना दिया है। निकाय और उपचुनाव की जीत असली वोट हैं, इसलिए यह मज़बूत दांव है। मगर अधूरा भी, क्योंकि चुनाव जीतना यह साबित नहीं करता कि कोई खास नाम सही काटा गया। विपक्ष का मामला रिकॉर्ड पर टिका है, स्कोरकार्ड पर नहीं। "घुसपैठियों" वाला आरोप माहौल गरमाता है, पर यह नहीं बताता कि गलती से किसका नाम कटा।
कांग्रेस की भी कमज़ोरी है। 2029 को पहले से धांधली वाला बताना X पर तीखी पंक्ति है, पर यह हार का अग्रिम बहाना भी लग सकता है, ठीक वही जो शाह कह रहे हैं। इस बीच केंद्र में खड़ी संस्थाएं या तो चुप हैं या धीमी: आयोग बोला नहीं, सुप्रीम कोर्ट कागज़ों का इंतज़ार कर रहा है और हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर का मामला नवंबर तक टाल दिया है।
अगर चुनाव जीतना मतदाता सूची के साफ होने का सबूत नहीं, और हारना उसके गड़बड़ होने का सबूत नहीं, तो SIR विवाद पर जनता का भरोसा किस सबूत से तय होना चाहिए?
किसने क्या कहा
मैं सीधे श्री राहुल गांधी से पूछना चाहता हूँ: क्या यह SIR का नतीजा है?
These elections serve as a lesson for Rahul Gandhi.
The Supreme Court had said appropriate sites need to be identified and designated, and we have precisely done that.
आगे किस पर नज़र रखें
- गुरुवार, 15 अक्टूबर: मेट्रो पाबंदी अवमानना मामले में केंद्र का हलफनामा और दिल्ली प्रदर्शन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई।
- INDIA गठबंधन SIR याचिका की 14 खामियां कब दूर करता है और सुप्रीम कोर्ट उसे कब सूचीबद्ध करता है।
- जयराम रमेश के धांधली वाले आरोप पर भाजपा का जवाब, और क्या राहुल गांधी शाह को सीधे जवाब देते हैं।
- इस्तीफे की मांग पर चुनाव आयोग या CEC ज्ञानेश कुमार का कोई सार्वजनिक बयान।
- 17 नवंबर: जंतर-मंतर पर यूथ कांग्रेस की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई।
आपकी राय
क्या आप पल्स के विश्लेषण से सहमत हैं?
स्रोत
- 'Recent polls serve as lesson for Rahul Gandhi': Amit Shah hits back at INDIA bloc amid anti-SIR stir ThePrint (ANI)
- Amit Shah cites Rajasthan, Tripura poll wins to attack opposition Asianet Newsable (ANI)
- Amit Shah's 'Crushing Defeat In 2029' Message To Oppn, Rejects Rahul Gandhi's SIR Charge The Daily Jagran
- Rahul Gandhi spreading lies about SIR to cover Congress poll defeats: Amit Shah amid CEC protests Scroll
- राहुल पर अमित शाह का पलटवार, SIR के बहाने घुसपैठियों को बचा रहे कांग्रेस नेता Prabhasakshi
- "Not going to happen": Jairam Ramesh dismisses Amit Shah's prediction of BJP's victory in 2029 Lok Sabha elections ANI
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