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शाम की पल्स: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर जगन का बदला रुख, टीडीपी और भाजपा का पलटवार

जगन ने 2023 के कानून को समर्थन देने पर अफसोस जताया। बहस अब नियुक्ति की निष्पक्षता और उनके अपने रिकॉर्ड पर है।

पैन इंडिया पल्स डेस्कइन रिपोर्टों पर आधारित: Moneycontrol, Siasat (PTI), The Economic Times (ANI), Free Press JournalRead in English

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Man in white shirt sitting at desk with crossed arms in office setting. · Image via Siasat (PTI)

चुनाव व्यवस्था पर जारी राजनीतिक बहस में सोमवार को एक नया पहलू जुड़ा। वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को दिया अपना समर्थन वापस लेने की बात कही है। मनीकंट्रोल और इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एएनआई की रिपोर्ट में उनका प्रस्ताव सामने आया। बाद में सियासत में प्रकाशित पीटीआई की खबर में टीडीपी और भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया आई। सुबह की पल्स में चुनाव संबंधी विरोध प्रदर्शनों की चर्चा थी; अब अधिकारियों को चुनने की व्यवस्था भी बहस के केंद्र में है।

जगन ने रविवार के संवाददाता सम्मेलन में अपना रुख रखा था। उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त चुनने वाली समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के प्रधान न्यायाधीश होने चाहिए। उन्होंने मौजूदा प्रक्रिया को समर्थन देने पर अफसोस जताया। इससे उनकी पार्टी की राजनीतिक स्थिति बदली है। इसे कानून में बदलाव या किसी नियुक्ति के रद्द होने की घोषणा नहीं समझना चाहिए।

मनीकंट्रोल के अनुसार मौजूदा समिति में प्रधानमंत्री, उनकी ओर से नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता होते हैं। जगन की आपत्ति इस व्यवस्था में सरकार के संख्यात्मक बहुमत पर है। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने राज्य चुनाव आयुक्तों के लिए भी निष्पक्ष नियुक्ति व्यवस्था मांगी। केंद्र और राज्य की नियुक्तियों पर उनकी मांग को एक जैसा मौजूदा कानूनी प्रावधान बताना गलत होगा।

टीडीपी नेता एन विजय कुमार ने पीटीआई से कहा कि सत्ता गंवाने के बाद जगन ने राजनीतिक सुविधा के हिसाब से रुख बदला है। उन्होंने राज्य चुनाव व्यवस्था के प्रति जगन सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। भाजपा नेता बी विनुषा रेड्डी ने समर्थन वापस लेने के समय पर सवाल किया और नियुक्ति संबंधी कानून बनाने के संसद के अधिकार का बचाव किया। दोनों पक्षों की बात रखने के साथ यह याद रखना जरूरी है कि राजनीतिक आरोप अपने आप किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं बनते।

मुंबई से राष्ट्रीय ध्यान खींच रही खबर में भी एक ठोस बदलाव हुआ है। फ्री प्रेस जर्नल और लोकसत्ता के मुताबिक अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर गोलीबारी के तीन संदिग्ध राजस्थान के कोटा में पकड़े गए हैं। लोकसत्ता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हवाले से मुंबई और राजस्थान पुलिस के समन्वय का ब्योरा दिया। सुबह महाराष्ट्र संस्करण में जिन संदिग्धों की तलाश का जिक्र था, वे अब पकड़े गए हैं। हमले की जिम्मेदारी और मकसद की जांच अलग सवाल हैं।

इन दोनों घटनाओं में जवाबदेही के अलग स्तर दिखाई देते हैं। पहली बहस अधिकार देने वाली प्रक्रिया की है और दूसरी उस अधिकार के इस्तेमाल की। नियुक्ति व्यवस्था पर राजनीतिक बयान से कानून नहीं बदलता; संदिग्ध पकड़े जाने से अपराध साबित नहीं होता। आगे सुधार का ठोस प्रस्ताव और जांच के पुष्ट सबूत ही बहस को अगले चरण में ले जाएंगे।

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पल्स डेस्क का विश्लेषण

जगन के विरोधियों का यह सवाल उचित है कि सत्ता से बाहर आने पर ही उन्हें इस व्यवस्था की कमी क्यों दिखी। लेकिन किसी प्रस्ताव के गुण-दोष पर चर्चा और उसे रखने वाले नेता के रिकॉर्ड की पड़ताल साथ हो सकती है। केवल नीयत पर बहस करके नियुक्ति व्यवस्था का सवाल अनुत्तरित छोड़ देना भी पर्याप्त नहीं होगा।

समिति में न्यायाधीश की मौजूदगी जगन का सुझाया उपाय है; उससे हर फैसले के निष्पक्ष होने की गारंटी नहीं मिलती। प्रक्रिया की पारदर्शिता, भागीदारी और निर्णय के कारणों को साथ परखना होगा। ऐसी कौन-सी नियुक्ति व्यवस्था होगी जिस पर लोग तब भी भरोसा करें, जब सत्ता उनकी विरोधी पार्टी के हाथ में हो?

आगे किस पर नज़र रखें

  • नियुक्ति समिति के प्रस्ताव पर सरकार और अन्य दलों की प्रतिक्रिया
  • राज्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर जगन का विस्तृत प्रस्ताव
  • कोटा में पकड़े गए संदिग्धों की भूमिका और मकसद के सबूत

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स्रोत

  1. Jagan Mohan Reddy regrets backing 2023 Election Commission law, calls it a mistake Moneycontrol
  2. Jagan regrets backing CEC appointment process; TDP, BJP hit back Siasat (PTI)
  3. YS Jagan Mohan Reddy calls for a transparent process to appoint CEC The Economic Times (ANI)
  4. Tiger Shroff Firing Case: Actor Rushed Injured Driver To Santacruz Police Station After Bullet Hit His Wrist, FIR Reveals Free Press Journal
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