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सुबह की पल्स: सुल्तानपुर में 26 मतदाता हटाने वाले फॉर्म आगे नहीं बढ़े

अधूरे आवेदन लेने पर बीएलओ चुनाव ड्यूटी से हटाया गया; मुकदमे में आरोपी की पहचान पर रिपोर्टों में अंतर है।

पैन इंडिया पल्स डेस्कइन रिपोर्टों पर आधारित: PTI / ABP Live, The Times of India, Hindustan Times, ANI / Webindia123अपडेट 27 October 2026, 8:35 am ISTRead in English

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UP CEO rejects voter deletion forms with 26 'Nand Lal' signatures; BLO booked · Image via PTI / ABP Live

उत्तर प्रदेश के चुनाव अधिकारियों के अनुसार सुल्तानपुर में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आए 26 अधूरे आवेदनों पर आगे कार्रवाई नहीं हुई। सोमवार रात टाइम्स ऑफ इंडिया और एबीपी लाइव में पीटीआई की रिपोर्ट ने जांच का विवरण दिया है। दोनों के अनुसार आवेदक की पहचान जांचे बिना अधूरे फॉर्म लेने पर बूथ लेवल अधिकारी को चुनाव संबंधी काम से हटा दिया गया। साझा निष्कर्ष यह है कि आवेदन जमा होने का अर्थ इन मामलों में मतदाता का नाम कट जाना नहीं था।

मामला सुल्तानपुर के सदर विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र 96 का है। फॉर्म-7 पर नंद लाल के नाम या उनके बताए गए हस्ताक्षरों से 26 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार आवेदक का नाम, मतदाता पहचान संख्या और मोबाइल नंबर जैसी जरूरी जानकारी अधूरी थी। इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि नंद लाल नाम के 26 लोगों को सूची से हटा दिया गया। शिकायत आवेदनों पर कथित फर्जी हस्ताक्षर की है, एक जैसे नाम वाले हर मतदाता की पहचान पर फैसला नहीं।

समाजवादी पार्टी ने 15 अक्टूबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामला उठाया था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जिला निर्वाचन प्रशासन से रिपोर्ट ली। यह क्रम पार्टी के आरोप, प्रशासनिक जांच और 26 अक्टूबर को बताए गए परिणाम में अंतर करता है। सपा ने गलत ढंग से नाम हटवाने की कोशिश का आरोप लगाया। अधिकारियों का कहना है कि अधूरे आवेदन आगे नहीं बढ़े। इससे अपने आप कथित कोशिश के पीछे किसी व्यापक राजनीतिक निर्देश या संगठन की भूमिका साबित नहीं होती।

पुलिस मामले के विवरण में महत्वपूर्ण अंतर है। पीटीआई की रिपोर्ट संबंधित बीएलओ के खिलाफ मुकदमा होने की बात कहती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट फर्जी हस्ताक्षर के आरोप पर प्राथमिकी का विवरण देती है और नंद लाल का नाम बताती है। दोनों 24 अक्टूबर को गोसाईगंज थाने में कार्रवाई का उल्लेख करती हैं। मूल प्राथमिकी मिलने तक इस संस्करण में आरोपी की पहचान को पक्का तथ्य नहीं माना गया है। मुकदमा दर्ज होना भी दोष सिद्ध होने से अलग है।

प्रशासनिक कार्रवाई का आधार अधिक स्पष्ट है। पहचान की पुष्टि किए बिना अधूरे फॉर्म लेने पर बीएलओ को चुनाव ड्यूटी से हटाया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी बताता है। यह निष्कर्ष किसी अधिकारी द्वारा वास्तव में मतदाता हटाने या राजनीतिक आदेश पर काम करने के निष्कर्ष के बराबर नहीं है। फॉर्म, जांच रिपोर्ट और पुलिस रिकॉर्ड संबंधित दस्तावेज हैं, लेकिन प्रत्येक अलग सवाल का उत्तर देता है। उन्हें सार्वजनिक करने से विवाद का तथ्यात्मक हिस्सा साफ हो सकता है।

पीटीआई ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का यह स्पष्टीकरण भी बताया कि मतदाताओं या उनके परिजनों के नाम मिलना भर प्रविष्टि को डुप्लीकेट मानने के लिए पर्याप्त नहीं है। वास्तविक दोहराव की पहचान, जांच और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है। यह हर शिकायत को गलत या हर राजनीतिक सूची को सही घोषित नहीं करता। कल की पल्स में राहुल गांधी के सुल्तानपुर मानहानि मामले में बरी होने की खबर थी। मतदाता फॉर्म की यह जांच उससे अलग है। अगला उपयोगी कदम मूल प्राथमिकी और प्रशासनिक रिपोर्ट से बाकी अंतर स्पष्ट करना होगा।

सुल्तानपुर में गांधी के काफिले के पीछे चल रहे वाहनों की टक्कर पर पुलिस ने सोमवार को तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई। हिंदुस्तान टाइम्स और एएनआई ने पुलिस विज्ञप्ति के आधार पर कारण, सुरक्षा, एस्कॉर्ट और यातायात व्यवस्था की जांच बताई। यह जांच का नया कदम है, सुरक्षा चूक या जानबूझकर टक्कर होने का निष्कर्ष नहीं।

पल्स की राय

पल्स डेस्क का विश्लेषण

अधूरे फॉर्म पर नाम न कटना एक स्तर पर रोक लगने का संकेत है। बिना पहचान जांचे उन्हें लेना दूसरे स्तर पर चूक है। दोनों बातें साथ सच हो सकती हैं।

व्यापक राजनीतिक हेरफेर का निष्कर्ष निकालने के लिए दस्तावेजों को किसी निर्देश और जिम्मेदार व्यक्ति से जोड़ने वाला प्रमाण चाहिए। पुलिस और चुनाव प्रशासन अब कौन सा रिकॉर्ड सार्वजनिक करेंगे?

What could happen next

Conditional scenarios based on current reporting, not confirmed plans or election forecasts.

  1. यदि प्राथमिकी और जांच रिपोर्ट सामने आती हैं तो आरोपी संबंधी अंतर स्पष्ट हो सकता है।

    दोनों रिपोर्ट अधूरे फॉर्म पर सहमत हैं, पुलिस मामले पर अंतर है।

    Watch for: मूल प्राथमिकी और अधिकारी का स्पष्ट स्पष्टीकरण। Reporting behind this scenario

आगे किस पर नज़र रखें

  • 24 अक्टूबर की मूल प्राथमिकी और आरोपी की पहचान।
  • प्रशासनिक जांच तथा विभागीय कार्रवाई का फैसला।
  • आवेदन से अलग वास्तव में हुए मतदाता सूची बदलाव।

आपकी राय

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स्रोत

  1. CEO account of incomplete Form-7 applications PTI / ABP Live
  2. Sultanpur inquiry and police action over deletion forms The Times of India
  3. Police form SIT to examine convoy collision Hindustan Times
  4. Police release and inquiry terms ANI / Webindia123

This piece is analysis written only from the published reports listed above. Pan India Pulse does no original reporting. How this site works

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