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सुबह की पल्स: पीलीभीत की मतदाता सूची में गड़बड़ी पर दो अफसरों के निलंबन का आदेश
पीलीभीत की मतदाता सूची में बदलावों पर दो अधिकारियों के निलंबन का आदेश; अब जाँच और सुधार की रिपोर्ट पर नज़र।
पैन इंडिया पल्स डेस्कइन रिपोर्टों पर आधारित: The Indian Express, Hindustan Timesअपडेट 2 November 2026, 1:35 pm ISTRead in English
पीलीभीत की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर निर्वाचन आयोग ने मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को निलंबित करने का आदेश दिया है। इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स ने कार्रवाई की खबर दी है। आयोग ने कानूनी और विभागीय कार्यवाही आगे बढ़ाने को कहा है। पिछले महीने उठे विवाद में यह नया प्रशासनिक कदम है।
दोनों अधिकारी पीलीभीत में उपजिलाधिकारी रह चुके हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार राज्य सरकार पहले ही उनका तबादला कर प्रतीक्षा सूची में डाल चुकी थी। तबादला, निलंबन और मुकदमे की कार्यवाही अलग प्रक्रियाएँ हैं। इनमें से किसी कदम को अपराध सिद्ध होने का फैसला नहीं माना जाना चाहिए। आरोपों का अंतिम नतीजा संबंधित जाँच और अदालत की प्रक्रिया से निकलेगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी की 22 अक्टूबर की जानकारी के मुताबिक कंप्यूटर सहायक ने 31 मई से 29 अगस्त के बीच फॉर्म आठ के 13,779 सुधार आवेदन दर्ज किए थे। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार कार्यालय में उनके कागजी फॉर्म और संबंधित दस्तावेज नहीं मिले। हर आवेदन की जाँच उसके रिकॉर्ड और मंजूरी से करनी होगी। केवल कुल संख्या से चुनाव में पड़े वोटों के बारे में निष्कर्ष नहीं निकलता।
आयोग ने दोनों अधिकारियों के आरोपपत्र अपने पास भेजने को कहा है। उसकी पूर्व अनुमति के बिना उन्हें बहाल नहीं किया जा सकेगा। रिपोर्टों में आदेश की सप्ताहांत की तारीख अलग दी गई है, इसलिए इस पल्स में कार्रवाई की पुष्टि के साथ तारीख का वह अंतर भी स्पष्ट रखा गया है।
समीक्षा पीलीभीत तक सीमित नहीं रखी गई है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उत्तर प्रदेश के जिला निर्वाचन अधिकारियों और पंजीकरण अधिकारियों को नाम जोड़ने, हटाने तथा विवरण बदलने की प्रविष्टियाँ दोबारा जाँचने को कहा गया है। पीलीभीत की छानबीन पर एक सप्ताह में रिपोर्ट माँगी गई है। अब उस रिपोर्ट से पता चलेगा कि कौन सी प्रविष्टि सही थी और कहाँ सुधार जरूरी है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने पिछले महीने यह मामला उठाया था। राजनीतिक बहस अपनी जगह है, लेकिन नागरिक के लिए सबसे सीधा सवाल उसकी अपनी प्रविष्टि का है। अफसरों पर कार्रवाई के साथ सूची ठीक होने का रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए। आगे की रिपोर्ट में जाँच का दायरा, किए गए सुधार और लंबित मामलों का साफ विवरण उपयोगी होगा।
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हमारी नज़र
पल्स डेस्क का विश्लेषणकार्रवाई से शिकायत की जाँच में अगला कदम सामने आया है। अब जवाबदेही को केवल निलंबन की संख्या से नहीं, गलत प्रविष्टियों के सुधार से भी देखना होगा।
यदि व्यापक समीक्षा में और मामले मिलें तो जिला स्तर के निष्कर्ष जरूरी होंगे। अगर समस्या सीमित निकले तो उसका कारण और सीमा बतानी होगी। प्रभावित मतदाता को अपनी जानकारी सही होने का भरोसा किस रिकॉर्ड से मिलेगा?
आगे किस पर नज़र रखें
- पीलीभीत की समीक्षा रिपोर्ट
- जिला स्तर की सूची जाँच के निष्कर्ष
- विभागीय और न्यायिक कार्यवाही
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स्रोत
- Source report The Indian Express
- Election Commission of India orders suspension of two EROs over voter list anomalies in Pilibhit Hindustan Times
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