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सुबह की पल्स: दवा के दाम पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल, फैसला सुरक्षित

सरकार ने सीमित नियमन का पक्ष रखा; सुनवाई से सभी दवाओं पर नई कीमत सीमा लागू नहीं हुई है।

पैन इंडिया पल्स डेस्कइन रिपोर्टों पर आधारित: The Economic Times, PTI / Kashmir VisionRead in English

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Image via The Economic Times

दवाएं दुकानदार को जिस कीमत पर मिलती हैं और मरीज जिस कीमत पर खरीदते हैं, उस अंतर पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को केंद्र से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। इकोनॉमिक टाइम्स और पीटीआई की रिपोर्ट इस घटनाक्रम की पुष्टि करती हैं। बुधवार की खबर फैसला आने का इंतजार है, दवा की दुकान पर लागू हो चुकी कोई नई छूट नहीं।

पीठ ने पूछा कि दवाओं के व्यापारिक मार्जिन पर अधिक व्यापक सीमा क्यों नहीं लग सकती। पीटीआई के मुताबिक केंद्र ने कैंसर की दवाओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 प्रतिशत तक मार्जिन सीमित करने के फैसले का उल्लेख किया। अदालत ने पूछा कि क्या इतना करना पर्याप्त है। सुनवाई के दौरान किसी सीमा पर सवाल उठने और उसे लिखित आदेश से लागू करने में फर्क है। सभी दवाओं पर 16 प्रतिशत की नई सीमा लागू होने का निष्कर्ष इन रिपोर्टों से नहीं निकलता।

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पूरी व्यवस्था को नियंत्रण में लाना सरकार की नीति नहीं है। उन्होंने भारत में दवाओं की कीमतें दुनिया में कम होने का तर्क दिया और लगातार संतुलन बनाने की बात कही। सरकार की दलील चुनिंदा हस्तक्षेप की है। अदालत पूछ रही है कि क्या इससे मरीजों को ऊंचे मार्जिन से पर्याप्त सुरक्षा मिल रही है। दोनों पक्षों की बात समझने के लिए वास्तविक आदेश का दायरा देखना जरूरी होगा।

पीटीआई ने दो याचिकाओं का जिक्र किया है। एक में दवाओं को किफायती बनाने और कीमत नियंत्रण की मांग है। दूसरी में जेनेरिक दवाएं न लिखने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई मांगी गई है। रिपोर्ट में औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 का संदर्भ भी है। ये अदालत से मांगी गई राहतें हैं। इन्हें हर कंपनी, दुकानदार या चिकित्सक के खिलाफ साबित आरोप नहीं माना जा सकता।

27 अक्टूबर की सुनवाई से पहले 12 अक्टूबर को भी इसी विषय पर चर्चा हुई थी। इसलिए अदालत सरकार की पिछली प्रतिक्रिया को भी परख रही थी। फिलहाल मरीज के लिए मौजूदा कीमत व्यवस्था और आने वाले फैसले को अलग समझना जरूरी है। सुरक्षित फैसले से अपने आप नया रिफंड अधिकार नहीं मिलता। अगली खबर में आदेश की तारीख, शामिल दवाएं, जिम्मेदार प्राधिकरण और लागू होने की समयसीमा बतानी होगी। एक अस्पताल के उदाहरण में अलग कीमतें मिलने के कारण वह तुलना यहां शामिल नहीं की गई है।

पल्स नज़रिया

पल्स डेस्क का विश्लेषण

मरीज की जेब और दवा बाजार की व्यवस्था, दोनों इस सुनवाई के केंद्र में हैं। व्यापक सीमा वितरण की कई कड़ियों को प्रभावित कर सकती है। सीमित नियंत्रण के साथ सवाल रहता है कि बाहर छूट गए मरीजों की सुरक्षा कैसे होगी।

लिखित फैसला बताएगा कि चर्चा से वास्तविक बदलाव कितना निकलता है। दवाओं की सूची और निगरानी की जिम्मेदारी उसके असर को समझने में मदद करेंगी। दवा के बिल का कौन सा हिस्सा सार्वजनिक रिपोर्टिंग में सबसे साफ दिखना चाहिए?

What could happen next

Conditional scenarios based on current reporting, not confirmed plans or election forecasts.

  1. अगर अदालत व्यापक मार्जिन नियंत्रण का निर्देश देती है, तो लागू करने की सूचना उसका दायरा तय करेगी।

    27 अक्टूबर की सुनवाई में व्यापक नियंत्रण पर चर्चा हुई, लेकिन फैसला सुरक्षित रहा।

    Watch for: लिखित फैसला, दवाओं की सूची और प्रभावी तारीख। Reporting behind this scenario

आगे किस पर नज़र रखें

  • लिखित फैसला और लागू निर्देश।
  • एनपीपीए की अगली कार्यान्वयन सूचना।
  • किन दवाओं पर बदलाव होगा और कब से।

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स्रोत

  1. Court questions medicine-pricing framework The Economic Times
  2. PTI account of reserved drug-pricing verdict PTI / Kashmir Vision

This piece is analysis written only from the published reports listed above. Pan India Pulse does no original reporting. How this site works

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